गुरुवार दोपहर को प्रयागराज-वाराणसी राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-19) पर एक ट्रांसपोर्ट टैंकर से प्रोपाइलीन नामक अत्यधिक ज्वलनशील गैस का रिसाव हुआ, जिससे इलाका अफरा-तफरी का शिकार बन गया। स्थानीय प्रशासन, अग्निशमन विभाग (Fire Brigade) और पुलिस ने तत्परता से कार्य करते हुए सम्भावित बड़ी दुर्घटना को टाला। यह घटना स्थानीय समय के अनुसार दोपहर लगभग 12 बजे हुई।
प्रयागराज-वाराणसी हाइवे गैस लीक कैसे हुआ?
हादसा तब हुआ जब मथुरा से ओडिशा जा रहा एक प्रोपाइलीन गैस टैंकर एक छोटी कार से टकरा गया। टक्कर के कारण टैंकर का वॉल्व क्षतिग्रस्त हो गया और गैस तेज़ी से बाहर निकलने लगी। यह गैस तेल उद्योगों और रसायन विभागों में उपयोग होने वाली ज्वलनशील सामग्री है, और हल्की सी चूक भी विस्फोट या आग जैसी गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकती है।
जैसे ही सफेद धुंधी‑सी गैस फैलती दिखी, स्थानीय लोगों और राहगीरों में भगदड़‑सी स्थिति बन गई और लोगों ने पुलिस व प्रशासन को सूचना दी। शुरुआती अफरा‑तफरी के बाद हालात को संभालने के लिए अधिकारियों ने हाईवे के दोनों ओर से वाहनों को रोक दिया और कुछ दूरी पर बैरिकेडिंग कर पूरा क्षेत्र सील कर दिया।
प्रशासन ने क्या कदम उठाए?
- सूचना मिलते ही थरवई/सराइनियत थाना पुलिस, एनएचएआई की टीम, फायर ब्रिगेड, एनडीआरएफ/एसडीआरएफ जैसी एजेंसियां मौके पर पहुंचीं। फायर ब्रिगेड की कई गाड़ियां लगातार पानी की तेज बौछार कर रही थीं, ताकि गैस का घनत्व कम हो और वह हवा में घुलकर आसपास की बस्तियों तक न फैले।
- स्थानीय पुलिस, एनएचएआई टीम और फायर ब्रिगेड मौके पर तुरंत पहुंचे। घटनास्थल से दोनों ओर लगभग 500–500 मीटर तक हाईवे पर यातायात रोक दिया गया। कई किलोमीटर तक वाहनों की लंबी कतारें लग गईं, ट्रक, बसें और निजी वाहन हाईवे पर ही फंसे रहे।
- गैस रिसाव को नियंत्रित करने के लिए लगभग 7-10 दमकल गाड़ियाँ और कर्मचारियों की एक टीम ने प्रयास किया।
- IOCL (Indian Oil Corporation Limited) के अधिकारियों को बुलाकर क्षतिग्रस्त वॉल्व में अस्थायी समाधान लगाया गया, फिर टैंकर को सुरक्षित स्थान पर खड़ा कर गैस को एक और वाहन में स्थानांतरित किया गया।
इन कार्यों में लगभग दो से तीन घंटे लगे, जिसके बाद सड़कों पर आवागमन फिर से खुला। आसपास के गांवों के लोगों को घरों से बाहर न निकलने और आग/चिंगारी का उपयोग न करने की हिदायत दी गई।
सतर्कता से टला बड़ा हादसा
प्रयागराज–वाराणसी हाईवे पर प्रोपाइलीन गैस टैंकर से लीकेज की यह घटना इस बात की ताजा याद दिलाती है कि हज़ार्डस केमिकल्स से जुड़ी छोटी‑सी चूक कितनी बड़ी त्रासदी में बदल सकती थी। तेज रेस्पॉन्स, हाईवे बंद करने का फैसला, दमकल की लगातार बौछार और तकनीकी कार्रवाई के कारण स्थिति को काबू में लाया गया और सामान्य यातायात धीरे‑धीरे बहाल हो सका।
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