प्रयागराज के करछना करछना ट्रेन दुर्घटना में एक मासूम की जिंदगी एक सामान्य सुबह थम गई। 14 साल का लवकुश यादव, जो हर दिन साइकिल पर स्कूल जाता था, रेलवे ट्रैक पार करते हुए ट्रेन की चपेट में आ गया।
करछना ट्रेन दुर्घटना का पूरा विवरण
लवकुश अपने पिता होरीलाल यादव उर्फ झल्लर के साथ करछना क्षेत्र के बाऊल का डेरा मुंगारी गांव में रहता था। वह चनैनी में एसएलबी इंटर कॉलेज या नवजीवन पब्लिक स्कूल में कक्षा छह या आठ में पढ़ता था। स्कूल पहुँचने में देर हो रही थी, इसलिए उसने ओवरब्रिज की बजाय रेलवे लाइन के नीचे बने संकरे रास्ते से गुजरने का निर्णय लिया। उसकी साइकिल का पहिया पटरी में फंस गया और वह उसे निकालने की कोशिश कर रहा था, तभी ट्रेन तेजी से आ गई। मौके पर ही उसकी मौत हो गई।
स्थानीय लोगों ने शव देखा तो परिजनों को खबर दी। परिवार के लोग रोते-बिलखते मौके पर पहुंचे और शव घर ले गए। पुलिस ने पोस्टमॉर्टम की सलाह दी, लेकिन परिजनों ने इनकार कर दिया। लवकुश अपने दो भाइयों में सबसे छोटा था, जिसकी मौत ने घर में सन्नाटा छा दिया।
लवकुश की मौत एक सबक है कि छोटी सी लापरवाही जिंदगी ले सकती है। जिसने उसकी ज़िंदगी और उसके परिवार का आराम छीन लिया। उसकी मासूमियत और सपना एक बार में ट्रेन की पटरी और हमारी लापरवाही के सामने घुट गए।
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