प्रयागराज से लगभग 50km दूर, घने जंगल और पहाड़ियों के बीच बसा है शंकरगढ़ कोट – जिसे स्थानीय लोग “राजा के महल” या “शंकरगढ़ कोट” के नाम से जानते हैं। यह स्मारक ऐतिहासिक होने के साथ ही मानव सभ्यता और संस्कृति की जीवंत मिसाल भी है। यहाँ के वातावरण प्राचीनता और शांति हर आने वाले को सम्मोहित करता है।
शंकरगढ़ कोट का इतिहास
इस कोट का निर्माण राजा कंधर देव ने किया था। उनके वंशज आज भी यहाँ की परंपराओं को जीवित रखते हैं। ब्रिटिश आर्थवस्था में इसे “कसौटा शंकरगढ़ बारा राज्य” कहा जाता था। राजा कमलाकर सिंह ने शिक्षा के क्षेत्र में योगदान देने के साथ ही “राजा कमलाकर इंटर कॉलेज” की स्थापना भी की थी। यहाँ दशकों से राजगद्दी उत्सव, शस्त्र पूजन और नजराना देने की परंपरा है।
स्थापत्य एवं कला
शंकरगढ़ कोट की दीवारें पत्थर और ईंट से बनी है, जिसमें प्राचीन भारतीय स्थापत्य के स्वरूप दिखते हैं। यहाँ के प्रमुख स्थल हैं :
- गढ़वा किला: शंकरगढ़ कोट से लगभग 5km दूर स्थित है। यह किला गुप्त कालीन मूर्तियों और अवशेषों के लिए प्रसिद्ध है।
- मूर्तिशाला: पुराने काल की मूर्तियाँ एवं पत्थर के खंभे भी मौजूद है।
- राम, शिव, हनुमान मंदिर: धार्मिक मान्यता के केंद्र और आस्था के प्रतीक के रूप में स्थित है।
धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
यहाँ का दशहरा उत्सव विशेष रूप से मनाया जाता है जिसमें शस्त्र पूजन, राजगद्दी का समारोह और नजराना आदि देने की परंपरा है। यहाँ की स्थानीय संस्कृति धार्मिक स्थलों, परंपराओं और त्योहारों में भी प्रतीत होती है। प्रत्येक साल हजारों की संख्या में लोग यहाँ पूजा करने व सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेने आते हैं।
पर्यटन गाइड कैसे पहुंचे:
प्रयागराज से शंकरगढ़ ट्रेन/बस के द्वारा आसानी से पहुंचा जा सकता है। ट्रेन से यात्रा करने में 33 मिनट से 1 घंटे तक लगता है। वहां पर आप गढ़वा किला शंकरगढ़ महल मंदिर स्थल और मूर्तिशाला आदि चीजें देखा सकते हैं। अक्टूबर-मार्च यहाँ यात्रा का बेहतर समय होता है जब मौसम सुहाना और त्योहारों का समय भी रहता है।
विरासत और भविष्य
शंकरगढ़ कोट वहाँ के निवासियों, पर्यटकों और इतिहास प्रेमियों के मन मेंं वही उत्साह जगाता है। शिक्षा, संस्कृति और राजसी परंपरा यहाँ के भविष्य को गौरव प्रदान करती है। सरकार एवं स्थानीय प्रशासन संरक्षण व प्रमोशन कार्यों में अपनी भूमिका दिखाता है।
जानिए ऐसे ही ऐतिहासिक एवं धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण भारद्वाज पार्क के बारे में –

